कुपोषण के खिलाफ हिमाचल और पंजाब का साझा संकल्प; धर्मशाला में ‘मिशन भरपूर 2.0’ पर मंथन
धर्मशाला/कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश और पंजाब की सरकारों ने महिलाओं और बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। पंजाब खाद्य आयोग के अध्यक्ष बाल मुकुंद शर्मा तथा हिमाचल प्रदेश खाद्य आयोग के अध्यक्ष डॉ. एस.पी. कत्याल ने धर्मशाला के समीप टंग स्थित आंगनबाड़ी केंद्र का विस्तृत निरीक्षण किया।
इस दौरान दोनों राज्यों के अध्यक्षों ने स्पष्ट किया कि महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ एवं गुणवत्तापूर्ण आहार उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। निरीक्षण के दौरान डॉ. एसपी कत्याल ने कहा कि कुपोषण जैसी गंभीर चुनौती पर प्रभावी रूप से विजय प्राप्त करने के लिए विभागीय समन्वय अत्यंत आवश्यक है।
इसी दिशा में पालमपुर स्थित सी.एस.आई.आर.-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएचबीटी) के सहयोग से ‘मिशन भरपूर 2.0’ का शुभारंभ किया गया है। इस मिशन का मुख्य लक्ष्य 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कुपोषण की श्रेणी से बाहर निकालकर उन्हें एक स्वस्थ जीवन प्रदान करना है।
उल्लेखनीय है कि इस मिशन का पहला चरण बेहद सफल रहा था, जिसमें लगभग 68 प्रतिशत कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई थी। इसी सफलता को आधार बनाकर अब इसका दूसरा चरण प्रदेश भर में लागू किया जा रहा है।
महत्वपूर्ण सुझाव और भविष्य की योजनाएं
पंजाब खाद्य आयोग के अध्यक्ष बाल मुकुंद शर्मा ने कांगड़ा प्रशासन और आईएचबीटी पालमपुर के तकनीकी सहयोग की सराहना की। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि पंजाब में भी इसी तर्ज पर कुपोषण उन्मूलन के लिए तकनीकी सहयोग लिया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयों में ‘पोषण वाटिका’ विकसित की जानी चाहिए ताकि बच्चों को ताजी एवं जैविक सब्जियां मिड-डे मील के रूप में मिल सकें। इसके अतिरिक्त, उन्होंने प्री-प्राइमरी स्तर के बच्चों को आंगनवाड़ी से जोड़ने पर भी बल दिया।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान और नई अनुशंसाएं डॉ. कत्याल ने इस अवसर पर बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने इस बजट में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्करों एवं सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी की है। उन्होंने केंद्र सरकार से कुछ महत्वपूर्ण अनुशंसाएं (Recommendations) भी की हैं:
- विकलांग बच्चों और वृद्धजनों को घर-द्वार पर राशन उपलब्ध कराना।
- प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना के तहत उन महिलाओं को भी 6 हजार रुपये की राशि प्रदान करना, जिनके दुर्भाग्यवश गर्भपात हो जाते हैं या मृत बच्चे जन्म लेते हैं।
- राशन की गुणवत्ता की जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध कराना।
