हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों के छात्र अब स्मार्ट बोर्ड और ई-लर्निंग के जरिए शिक्षा प्राप्त करेंगे। शिक्षा विभाग ने प्रदेश के 1000 सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को ‘डिजिटल क्लासरूम’ में बदलने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को वह आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराना है, जो अब तक केवल बड़े निजी स्कूलों (Convent Schools) तक ही सीमित थी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि इस योजना के लिए विश्व बैंक (World Bank) से वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। डिजिटल क्लासरूम के तहत हर कक्षा में हाई-स्पीड इंटरनेट, इंटरेक्टिव स्मार्ट बोर्ड और ई-कंटेंट उपलब्ध कराया जाएगा। इससे न केवल बच्चों को कठिन विषयों को समझने में आसानी होगी, बल्कि शिक्षकों को भी आधुनिक उपकरणों के साथ पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इसके लिए एक विशेष ‘सॉफ्टवेयर मॉड्यूल’ तैयार किया है, जिसमें हिमाचल के पाठ्यक्रम के अनुसार वीडियो और एनीमेशन शामिल होंगे।
पहले चरण में उन स्कूलों को चुना गया है जहाँ छात्रों की संख्या अधिक है और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल क्रांति से सरकारी स्कूलों में गिरने वाले नामांकन (Enrollment) को रोकने में मदद मिलेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह हिमाचल को ‘एजुकेशन हब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है और आने वाले समय में इसे प्राथमिक स्तर तक भी विस्तारित किया जाएगा।






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